बिहार / झारखण्डराज्‍य

गैस किल्लत से परेशान दुकानदार, रांची में आम लोगों की थाली हुई महंगी

रांची

 शहर में बढ़ती महंगाई के बीच अब ठेला-खोमचा और स्ट्रीट फूड भी आम लोगों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। गैस सिलिंडर की किल्लत और ब्लैक में अधिक कीमत पर गैस खरीदने की मजबूरी ने फास्ट फूड से लेकर पारंपरिक नाश्ते तक की कीमतें बढ़ा दी है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, मजदूर, छात्र और रोज कमाकर खाने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जो सस्ते और गर्म खाने के लिए ठेला-खोमचा पर निर्भर रहते हैं।

शहर के कई इलाकों में एग रोल, चौमिन, पकौड़ी, समोसा, जलेबी, कचौड़ी और कुलचा-नान जैसे खाद्य पदार्थों के दाम में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले 30 से 40 रुपये में मिलने वाला एग रोल अब 60 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 8 रुपये में बिकने वाला समोसा, आलू चाप और कचौड़ी अब 10 रुपये से लेकर कई जगहों पर 15 रुपये प्रति पीस तक बिक रहा है।

गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से दुकानदारों को उठानी पड़ रही परेशानी
इसी तरह 10 रुपये प्लेट मिलने वाली पकौड़ी अब 20 रुपये तक पहुंच गई है। जलेबी का भाव भी 30 रुपये पाव से बढ़कर 40 रुपये पाव हो गया है। कुलचा-नान और अन्य फास्ट फूड की कीमतों में भी लगभग 20 रुपये तक का इजाफा देखा जा रहा है।

दुकानदारों का कहना है कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर के कई फास्ट फूड दुकानदारों ने बताया कि जितनी संख्या में गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, उतनी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर बाहर से गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है।

एक गैस सिलिंडर पांच से छह दिनों तक चलता
एक फास्ट फूड संचालक ने बताया कि चौमिन, चिल्ली और एग रोल बनाने में रोजाना अधिक गैस की खपत होती है। लेकिन गैस नहीं मिलने से खर्च बढ़ गया है, जिसके कारण खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने पड़े हैं।

वहीं एक समोसा दुकानदार ने कहा कि उनकी दुकान में एक गैस सिलेंडर पांच से छह दिनों में खत्म हो जाता है। समय पर सिलेंडर नहीं मिलने पर उन्हें ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई छोटे दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह उनकी मजबूरी बन चुकी है।

बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी
उधर, ठेला-खोमचा में खाना खाने वाले लोगों का कहना है कि उनकी आय सीमित है और बड़े होटल या रेस्टोरेंट में खाना उनके बजट से बाहर है। ऐसे में ठेला-खोमचा ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा है।

लोगों ने बताया कि कम कीमत में ताजा और गर्म खाना मिलने के कारण वे वर्षों से स्ट्रीट फूड पर निर्भर हैं, लेकिन अब यहां भी लगातार बढ़ती कीमतों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button